जब-जब मैं सोचता हूँ यही बस सोचता हूँ। तन्हाई में अक्सर तुमको ही क्यों सोचता हूँ। मिलती नहीं फुरसत ख्यालों से तेरे। तेरे संग मेरी दोस्ती को सोचता हूँ।
मेरी सुनी सी जिन्दगी में जो हो गयी है तेरे आने से। मैं उस रोशनी को सोचता हूँ। हर पल में होती है महसूस कमी तेरी। जो तुझसे की थी बेपनाह उस आशिकी को सोचता हूँ।
मेरे जीने की तू बन गयी है वजह। डर जाता हूँ जब तेरे बगैर जिन्दगी को सोचता हूँ। देख कर मुझको जो आ जाती है तेरे चेहरे पर। उस दिलकश हँसी को सोचता हूँ।
तेरे रूठ जाने से जो होती है मुझको। मैं उस बेबसी को सोचता हूँ। तेरे मिलने से पहले जलता था जिसमे। पल-पल उस तिश्नगी को सोचता हूँ।
तन्हाई में किसी रोज जो लिखी थी तेरे लिए। मैं उस अनकही शायरी को सोचता हूँ। जो बयान कर सके हाल-ए-दिल मेरा। मैं उस पंक्ति को सोचता हूँ। कितना ही सोचा पर समझ ना पाया। क्यों है घडी बस तुम्ही को सोचता हूँ।

ー Priyank Sharma.