Tag: Priyank Sharma Poetry

मन में लाखों उलझन थी। दिल में खासा शोर था। ये बात उन दिनों की है यारो। जब प्रेम-पत्र का दौर था। सबके छुपकर तन्हाई में। खत हम लिखा करते थे। अक्सर खत के पन्नों में। एक-दूजे के चेहरे दिखते थे।कदम-कदम पर पहरे थे। डरते थे घबराते थे। हिम्मत कर के छूप-छूप कर। एक-दूजे को […]

Read more

उसने मेरे सवाल का जवाब लिखा दे। जवाब में उसने इनकार भी लिखा है। बिखरी हुई सियाही बयान करती है। उसने आँखों से इकरार भी लिखा है। उसने अपने दिल की कहानी लिखी है। अपनी मोहब्बत का वास्ता भी लिखा है। ये भी लिखा है मेरे घर ना आना। साफ लफ्जो में घर का रास्ता […]

Read more

क्या सुकून था जीने में। ना दिल में दर्द छुपाते थे। वो रातें भी क्या रातें थी। बस दो पल में सो जाते थे। मासूमी चेहरे पर थी। हम खुलकर बातें करते थे। नादानी थी फितरत में। गलती करने से डरते थे। बचकानी सी बातों को हम। बार-बार दोहराते थे। वो रातें भी क्या रातें […]

Read more

कोई तुमसे जो पूछे कौन हूँ मैं। कह देना तुम कोई खास नहीं। एक दोस्त कच्चा-पक्का सा। एक झूठा थोडा सच्चा सा। एक गुजरा हुए लम्हे सा। एक बाहाना अच्छा सा। एक बिछड़ा हुआ साथी है। जो अब दिल के पास नहीं।कोई तुमसे जो पूछे कौन हूँ मैं। कह देना तुम कोई खास नहीं। एक […]

Read more