कोई तुमसे जो पूछे कौन हूँ मैं। कह देना तुम कोई खास नहीं। एक दोस्त कच्चा-पक्का सा। एक झूठा थोडा सच्चा सा। एक गुजरा हुए लम्हे सा। एक बाहाना अच्छा सा। एक बिछड़ा हुआ साथी है। जो अब दिल के पास नहीं।
कोई तुमसे जो पूछे कौन हूँ मैं। कह देना तुम कोई खास नहीं। एक थम चुके तूफान सा। एक शैतान थोडा नादान सा एक भूली हुई याद सा। एक मर चूके एहसास सा। एक अजनबी सा हमसफर है। जिसके सीने में जज्बात नहीं।
कोई तुमसे जो पूछे कौन हूँ मैं। कह देना तुम कोई खास नहीं। एक अनकही सी बात सा। एक तन्हा अकेली रात सा। एक अनचाहे साया सा। एक अपना है पराया सा। एक अधूरी सी ख्वाहिश है। जिसके पुरे होने की आस नहीं।
कोई तुमसे जो पूछे कौन हूँ मैं। कह देना तुम कोई खास नहीं। एक टूटी हुई तस्वीर सा। एक रूठी हुई तकदीर सा। एक मुरझाये फूल सा। एक बचपन की भूल सा। एक खुदगर्ज सा इंसान है। जिसपर हमको विश्वास नहीं।
कोई तुमसे जो पूछे कौन हूँ मैं। कह देना तुम कोई खास नहीं। एक दबे हुए राज सा। एक बेसुरे साज सा। एक बुझ चुकी प्यास सा। एक चुभी हुई फास सा। एक जिंदा लाश सा। जिसकी लहद उसके पास नहीं।
कोई तुमसे जो पूछे कौन हूँ मैं। कह देना तुम कोई खास नहीं।

ー Priyank Sharma.