ये बेमौसम बरसातें जब भी आती हैं।
अपने साथ ये तेरी यादें भी ले आती हैं।
ये सर्द हवाएँ तेरे संग होने का हमको अहसास कराती।
जैसे तू चुपके से आती हैं और सीने से लग जाती हैं।
ये बारिश की बूंदें धरती पर गिर कर ऐसा राग बनाती हैं।
जैसे तू कानों में मेरे कोई गीत सुनाती है।
मन करता है फिर तेरे संग कोई शरारत करने का।
धीरे-धीरे मेरे दिल की धड़कन फिर बढ़ जाती।
ये बेमौसम बरसातें जब भी आती हैं।
अपने साथ ये तेरी यादें भी ले आती हैं।

ये काली घटा आसमान में ऐसे घिर कर आती है।
जैसे तू थोड़ा इतरा के अपनी जुल्फें बिखरती है।
ये बिजली रुक-रुक कर ऐसे गरज गिराती हैं।
जैसे गुस्से में आकर तू मुझको आँख दिखाती है।
बेवजह बस खुद में ही हम मुस्कुराने लगते हैं।
बैठे-बैठे दिल में फिर बस प्रीत कोई जग जाती है।
ये बेमौसम बरसातें जब भी आती हैं।
अपने साथ ये तेरी यादें भी ले आती हैं।

ये सतरंगी रेखाएं इंद्रधनुष की ऐसी तस्वीर बनाती हैं।
जैसे तू मुझसे शर्मा कर मंद-मंद मुस्काती है।
ये खुशबू मीठी मीठी सी हमको बहुत ही भाति है।
जैसे तेरे संग होने का ये एहसास कराती है।
याद तुझे कर के मैं जब भी आखें मेरी बंद करता हूँ।
ऐसा होता है तू मेरे सामने ही आ जाती है।
ये बेमौसम बरसातें जब भी आती हैं।
अपने साथ ये तेरी यादें भी ले आती हैं।

ये गिर कर सुखी धरती को पल भर में तर कर जाती है।
जैसे तेरे आ जाने से मेरी खुशियां बढ़ जाती हैं।
ये एक नयी ताजगी सी फिजाओं में ले आती है।
जैसे आकर के पास तेरे मेरी तबियत खिल जाती है।
पलभर का ये सपना मेरा पल भर की ये बारिश है।
पलभर को ये आती है और बस फिर खो जाती है।
ये बेमौसम बरसातें जब भी आती हैं।
अपने साथ ये तेरी यादें भी ले आती हैं।

Written By – Priyank Sharma.